टाइटैनिक डूबा अटलांटिक में ,अवशेष मिला स्पेन में

आज तक़रीबन 103 साल बाद टाइटैनिक के  कुछ अवशेष  स्पेन में मिले। टाइटैनिक दुनिया  की सबसे बड़ी जहाज थी जी सन 1912 में ग्रेट ब्रिटेन  बनाया था और यह अपनी पहली यात्रा के दौरान दुर्घटना ग्रस्त  हो गया था।


टाइटैनिक ने अपनी यात्रा 10 अप्रैल 1912 को शुरू की और यात्रा  ठीक चार दिन बाद यानी 14 अप्रैल 1912 को अटलांटिक महासागर में एक बर्फ के पहाड़ से टकराकर टूट गया।आज तक ये दुनिया का सबसे बड़ा जहाजी हादसा है। क्या अपने सोचा है कि इतने बड़े जहाज से एक बर्फ का पहाड़ भी भरी क्यों पड़ गया ?? चलिए आज हम आपको बताते है।  इतने बड़े हादसे के बाद एक बहुत ही बड़ा रहस्य उजागर हुआ।  आर्कमिडीज ने अपने सिद्धांत में यह उल्लेख किया कि  बर्फ का घनत्व जल के घनत्व से कम होता है और यह पानी में तैरता है।  लेकिन एक और तथ्य यह है की बर्फ का 90% भाग जल के अंदर एवं शेष 10% भाग ऊपर दिखाई देता है।  तो अब आप समझ गए होंगे की टाइटैनिक जहाज के टक्कर ने उस बर्फ के पहाड़ को क्यों नही तोड़ पाया और खुद दो टुकड़ो में बट गया। 

जो अवशेष स्पेन में मिले है उनका सत्यापन उन वस्तुओ पर लगे जहाज के मोहर द्वारा किया गया है यह साडी वस्तुए पीतल की जिनका वजन करीब 2 किलो है।

यह पीतल की पट्टी को एक आदमी एक व्यापारी को बेचने आया था और उसे व्यापारी ने खरीद लिया और उसने खबर दी की उसके पास टाइटैनिक  का अवशेष है जो कुछ समय पहले एक अफसर  खो गया था।
टाइटैनिक अपने समय में सबसे आधुनिक तकनिकी से सुसजज्ित था और  उसे उस समय के सबसे बेहतरीन इंजीनियर ने मिलकर बनाया था.
यह जहाज २२२५ यात्रियों  के साथ न्यूयार्क के लिया रवाना हुआ था। इसे आयरलैंड में बनाया गया था।
         दोस्तों ,जहा तक मेरा मानना है ,अभी भी वैज्ञानिक तकनीक इतना विकसित नहीं हुआ कि हमारे विश्व के वैज्ञानिक सभी बातो का पता लगा सके।  अभी भी कुछ ऐसे तथ्य है जिनके बारे में पता लगाना असंभव सा प्रतीत होता है।  जैसे :- बरमूडा का रहस्यमयी ट्रायंगल (Barmooda Triangle ).  न जाने कितने जलपोत ,विमान , जीव -जंतु उस ट्रायंगल में समाहित हो गए। और उनका कुछ भी पता न लगाया जा सका है।


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