2016 - Altu & Faltu

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10 सित॰ 2016

आपका साथ देने वाला कौन है पत्नी या बेटा

8:34 am 1

आपका साथ देने वाला कौन है पत्नी या बेटा



जॉब से शादी तक:


life at 22




जीवन के *20* साल हवा की तरह उड़ गए । फिर शुरू हुई *नोकरी* की खोज । ये नहीं वो , दूर नहीं पास । ऐसा करते करते *2 .. 3* नोकरियाँ छोड़ने एक तय हुई। थोड़ी स्थिरता की शुरुआत हुई।

फिर हाथ आया पहली तनख्वाह का *चेक*। वह *बैंक* में जमा हुआ और शुरू हुआ अकाउंट में जमा होने वाले *शून्यों* का अंतहीन खेल। *2- 3* वर्ष और निकल गए। बैंक में थोड़े और *शून्य* बढ़ गए। उम्र *27* हो गयी।

और फिर *विवाह* हो गया। जीवन की *राम कहानी* शुरू हो गयी। शुरू के *2 ..  4* साल नर्म , गुलाबी, रसीले , सपनीले गुजरे । हाथो में हाथ डालकर घूमना फिरना, रंग बिरंगे सपने। *पर ये दिन जल्दी ही उड़ गए*।

बच्चे से बैंक बैलेंस तक:

baby



और फिर *बच्चे* के आने ही आहट हुई। वर्ष भर में *पालना* झूलने लगा। अब सारा ध्यान बच्चे पर केन्द्रित हो गया। उठना - बैठना, खाना - पीना, लाड - दुलार । समय कैसे फटाफट निकल गया, पता ही नहीं चला।

*इस बीच कब मेरा हाथ उसके हाथ से निकल गया, बाते- करना घूमना - फिरना कब बंद हो गया दोनों को पता ही न चला*।
*बच्चा* बड़ा होता गया। वो *बच्चे* में व्यस्त हो गयी, मैं अपने *काम* में । घर और गाडी की *क़िस्त*, बच्चे की जिम्मेदारी, शिक्षा और भविष्य की सुविधा और साथ ही बैंक में *शुन्य* बढाने की चिंता। उसने भी अपने आप काम में पूरी तरह झोंक दिया और मेने भी....
इतने में मैं *37* का हो गया। घर, गाडी, बैंक में *शुन्य*, परिवार सब है फिर भी कुछ कमी है ? पर वो है क्या समझ नहीं आया। उसकी चिड चिड बढती गयी, मैं उदासीन होने लगा।

इस बीच दिन बीतते गए। समय गुजरता गया। बच्चा बड़ा होता गया। उसका खुद का संसार तैयार होता गया। कब *10वि*   *anniversary*आई और चली गयी पता ही नहीं चला। तब तक दोनों ही *40 42* के हो गए। बैंक में *शुन्य* बढ़ता ही गया।
एक नितांत एकांत क्षण में मुझे वो *गुजरे* दिन याद आये और मौका देख कर उस से कहा " अरे जरा यहाँ आओ, पास बैठो। चलो हाथ में हाथ डालकर कही घूम के आते हैं।"

उसने अजीब नजरो से मुझे देखा और कहा कि " *तुम्हे कुछ भी सूझता* *है यहाँ ढेर सारा काम पड़ा है तुम्हे* *बातो की सूझ रही है*।"
कमर में पल्लू खोंस वो निकल गयी।


तो फिर आया *पैंतालिसवा* साल, आँखों पर चश्मा लग गया, बाल काला रंग छोड़ने लगे, दिमाग में कुछ उलझने शुरू हो गयी।
बेटा उधर कॉलेज में था, इधर बैंक में *शुन्य* बढ़ रहे थे। देखते ही देखते उसका *कॉलेज* ख़त्म। वह अपने पैरो पे खड़ा हो गया। उसके पंख फूटे और उड़ गया *परदेश*।

उसके *बालो का काला* रंग भी उड़ने लगा। कभी कभी दिमाग साथ छोड़ने लगा। उसे *चश्मा* भी लग गया। मैं खुद *बुढा* हो गया। वो भी *उमरदराज* लगने लगी।

बच्चे की शादी और बीवी का साथ :

life at 65



दोनों *55* से *60* की और बढ़ने लगे। बैंक के *शून्यों* की कोई खबर नहीं। बाहर आने जाने के कार्यक्रम बंद होने लगे।
अब तो *गोली दवाइयों* के दिन और समय निश्चित होने लगे। *बच्चे* बड़े होंगे तब हम *साथ* रहेंगे सोच कर लिया गया घर अब बोझ लगने लगा। *बच्चे* कब *वापिस* आयेंगे यही सोचते सोचते बाकी के दिन गुजरने लगे।

एक दिन यूँ ही सोफे पे बेठा ठंडी हवा का आनंद ले रहा था। वो दिया बाती कर रही थी। तभी *फोन* की घंटी बजी। लपक के *फोन* उठाया। *दूसरी तरफ बेटा था*। जिसने कहा कि उसने *शादी* कर ली और अब *परदेश* में ही रहेगा।

उसने ये भी कहा कि पिताजी आपके बैंक के *शून्यों* को किसी *वृद्धाश्रम* में दे देना। और *आप भी वही रह लेना*। कुछ और ओपचारिक बाते कह कर बेटे ने फोन रख दिया।

मैं पुन: सोफे पर आकर बेठ गया। उसकी भी पूजा ख़त्म होने को आई थी। मैंने उसे आवाज दी *"चलो आज फिर हाथो में हाथ लेके बात करते हैं*"
*वो तुरंत बोली " अभी आई"।*

मुझे विश्वास नहीं हुआ। *चेहरा ख़ुशी से चमक उठा*। आँखे भर आई। आँखों से आंसू गिरने लगे और गाल भीग गए । अचानक आँखों की *चमक फीकी* पड़ गयी और मैं *निस्तेज* हो गया। हमेशा के लिए !!

उसने शेष पूजा की और मेरे पास आके बैठ गयी " *बोलो क्या बोल रहे थे*?"
लेकिन मेने कुछ नहीं कहा। उसने मेरे शरीर को छू कर देखा। शरीर बिलकुल *ठंडा* पड गया था। मैं उसकी और एकटक देख रहा था।
क्षण भर को वो शून्य हो गयी।
" *क्या करू*? "


उसे कुछ समझ में नहीं आया। लेकिन *एक दो* मिनट में ही वो चेतन्य हो गयी। धीरे से उठी पूजा घर में गयी। एक अगरबत्ती की। *इश्वर को प्रणाम किया*। और फिर से आके सोफे पे बैठ गयी। मेरा *ठंडा हाथ* अपने हाथो में लिया और बोली
" *चलो कहाँ घुमने चलना है तुम्हे* ? *क्या बातें करनी हैं तुम्हे*?" *बोलो* !! ऐसा कहते हुए उसकी आँखे भर आई !!......





वो एकटक मुझे देखती रही। *आँखों से अश्रु धारा बह निकली*। मेरा सर उसके कंधो पर गिर गया। ठंडी हवा का झोंका अब भी चल रहा था।

*क्या ये ही जिन्दगी है ? ?*
सब अपना नसीब साथ लेके आते हैं इसलिए कुछ समय अपने लिए भी निकालो । जीवन अपना है तो जीने के तरीके भी अपने रखो। शुरुआत आज से करो। क्यूंकि कल कभी नहीं आएगा।

सभी मित्रों को समर्पित ये मार्मिक सच ,मित्रो अश्रु जरूर बहने देना रोकना नहीं बोझ कुछ कम हो जायेगा।  
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23 अग॰ 2016

लड़की पटाने का ख्याल है तो ये 10 बातें एक बार जरूर पढ़ें

12:53 pm 3
ये हैं लड़कों को रिजेक्ट करते वक्त लड़कियों के 10 बहाने:-



1. तुम तो मेरे भाई जैसे हो-

 प्यार का इजहार करते ही लड़कों के दिलों दिमाग में रक्षा बंधन का एहसास लाने वाला जो बहाना सबसे पहले आता है, वो है- तुम तो मेरे भाई जैसे हो. मैंने तुम्हें कभी इस नजर से नहीं देखा. मैं तो तुम्हें भाई मानती थी और तुम...छी छी. यह बहाना लड़कों में धिक्कार भाव को अनचाहा जन्म देता है. बहाना सुनते ही आशिक को कई दिन सदमे से निकलने में लग जाते हैं.

2.प्यार माई फुट-
जिस तरह भूत है या नहीं, इसको लेकर काफी संशय है, ठीक उसी तरह कुछ सुंदरियों को प्यार के अस्तित्व पर शक रहता है. ऐसे में कोई मासूम दिल किसी सुंदरी से प्यार करने की गुस्ताखी कर बैठता है तो पहला जवाब आता है. 'प्यार माई फुट', मुझे प्यार में यकीन नहीं है. हालांकि यह बहाना आज के दौर में वीसीआर कैसेट की तरह हो गयाहै, जिसका इस्तेमाल कम ही होता है.

3.अपनी शक्ल देखी है क्या-
जब बात दिल की चल रही हो और शक्ल बीच में आ जाए तो समझ लीजिए कि आपका मामला अमुक इश्क के मंदिर में फिट नहीं होगा.
लड़कियां प्यार का इजहार करते वक्त अक्सर गुस्से में यह कह देती हैं कि 'अपनी शक्ल देखी है क्या'. ऐसे में उन लड़कों का दिल सबसे ज्यादा टूटता है, जो महीने में कई बार छिप-छिप कर फेशियल करवाते हैं.

4.सारे लड़के एक जैसे होते हैं-

वो लड़कियां जिन्हें प्यार में लड़के धोखा दे देते हैं, ऐसी लड़कियां लड़कों को लेकर एक बुरी छवि बना लेती हैं और हर बार करीब आने वाले लड़के को इस पुरस्कार से नवाजती हैं कि 'सारे लड़के एक जैसे होते हैं'. हालांकि यह बहाना 'शक्ल देखी है' वाले बहाने की काट करता है.

5.मां-बाप को धोखा-
बॉर्नवीटा और भगवान कृष्ण को गुरु मानते हुए लड़के अपने रपटते दिल की बात जैसे ही लड़कियों के सामने रखते हैं, फट से जैसे जवाब आता है, मैं अपने मां-बाप-परिवार को धोखा नहीं दे सकती. इस बहाने को सुनते ही लड़कों के मन में ख्याल आता है कि प्यार मांगा है तुम्हीं से..घर की रजिस्ट्री के कागज नहीं मांगे हैं.

6.करियर जरूरी है भई-
प्यार करने के बाद करियर चौपट हो जाता है. इस अटूट सत्य का ज्ञान लड़कों के प्यार का इजहार करते ही लड़कियां दे देती हैं. इजहार करने वाले लड़कों को यह ज्ञान तब मिलता है, जब वो अपनी ट्यूशन फीस से कई मर्तबा ग्रीटिंग कार्ड खरीदने में खर्च कर चुके होते हैं.

7.मेरी उम्र ही क्या है-
प्यार करने के लिए वोटर कार्ड जरूरी होता है क्या. यही सवाल सोचते हुए लड़कों ने घंटों पार्क में बिता दिए होंगे, जब किसी खूबसूरत प्रेमिका ने यह कहा होगा कि मेरी अभी उम्र ही क्या है. तुम मुझसे उम्र में बड़े या छोटे हो.

8.बाबा जी का ठुल्लू-
 प्यार को कबूल न करने के बहानों में इस बहाने का एंट्री जल्दी ही हुई है. पर जिस तेजी से इसने एकतरफा इश्क की बगिया में पांव पसारे हैं,
ऐसा मालूम होता है कि आने वाला कल इसी बहाने का है.

9.मेरा ब्वॉयफ्रेंड है-
मेरा ब्वॉयफ्रेंड है..बस ये सुनते ही लड़कों के दिमाग और जुबां पर यही सवाल आ जाता है कि मुझमें क्या कमी है. इस बहाने को कुंठा पैदा करने कीश्रेणी में अव्वल दर्जा प्राप्त है. इस बहाने के कान में घुसते ही लड़के आसमान की ओरदेखते हुए कल्पनाओं के सागर में उतरकर अपनी तुलना उस लड़के से करने लगते हैं, जिसका जिक्र बहाने के तौर पर या सच्चाई बताते हुए लड़कियां कर देती हैं.

10. मैं उस तरह की लड़की नहीं हूं-
महिलाओं को बांटने की रणनीति के तहत ही इस बहाने का जन्म हुआ था. लड़कों को कई मर्तबा 3 जादुई शब्द सुनने को मिल जाते हैं. मैं बाकी लड़कियों जैसी नहीं हूं. ऐसे में प्यार का इजहार करने वाले के मन में भी यह शक और खोज करने की इच्छा पैदा हो जाती है कि मैं अब उस तरह की लड़की कहां से लाऊं.प्यार का मजा तब ही है, जब कई बार इंकार हो, तकरार हो, कभी कभार मार भी हो.

तो ऐसे में अगर कोई लड़का किसी लड़की से सच्ची मोहब्बत करता है, तो वो इन बहानों से न घबराए और प्यार को साबित करने की कोशिश करते रहे. लेकिन सीमाओं का ध्यान रहे, डर फिल्म के शाहरुख खान बनोगे तो भैया वही हाल होगा जो शाहरुख का कि..कि. करते हुए फिल्म के आखिरमें हुआ था. बाकी प्यार सच्चा है तो राहत इंदौरी के तोड़े गए इस शेर को दिमाग में बैठा लीजिए,
'फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो,
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर कर नदियां पार करो'.
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12 अग॰ 2016

Pokemon Prank Videos | इन्टरनेट पर सबसे वायरल stuff

12:15 pm 2
हेल्लो दोस्तों ! काफी दिनों के बाद मेरा मन हुआ की इस वेबसाइट पर भी थोडा तार छेड़ा जाये. क्योकि बड़े दिनों से व्यस्तता चल रही थी .

कुछ दिनों से आपने भी देखा होगा की पोकेमोन नाम का गेम इन्टरनेट पर बड़ा ही मशहूर हुआ है . Game तो छोडिये , इस गेम के ऊपर लोग प्रैंक विडियो भी बना रहे हैं और ऐसे वीडियो इन्टरनेट पर बहुत ही तेजी से वायरल हुआ है.

कुछ Prank Videos को थोडा ओवर दिखाया गया है . मतलब की लोगो को जबरदस्ती हँसाने की कोशिश की गयी है. और कुछ वीडियो में रियल में ही Pokemon गेम खेल कर लोगो के साथ Prank किया जा रहा है . तो अगर आप भी Pokemon Game के शौक़ीन हैं तो इन Videos को एक बार जरुर देखे जिनको पहले से ही लाखो लोग इन्टरनेट पर देख चुके हैं.

उम्मीद है की आपको भी ये video पसंद आएगा.








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23 मई 2016

क्या सभी Engineering Students ऐसे ही होते हैं?

12:33 am 0
क्या आप एक Engineering Student हैं? अगर हाँ तो इस आर्टिकल को पढ़ते ही आपके दिल में गिटार जरूर बजेगा। और अगर आप एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट नही है तो भी आपको पढ़ना चाहिए,,
"Engineering students"


1-  हमेशा 2 अलार्म लगाते हैं एक  थोड़ा थोड़ा उठने के लिए , और दूसरा सचमुच में उठने के लिए ।

2- Deo सिर्फ इसलिए लगाते हैं ताकि कोई ये न पता कर पाये कि ये बिना नहाये class में आया है।

3- गंदे कपड़ों में भी, कम गंदे कपड़े  ढूंढ ढूंढ कर निकालते है।

4- कंपनियाँ Maggie Noodles सिर्फ इसलिए बनातीं हैं ताकि ये लोग भूखे न मरे ।

5- रिजल्ट आने पर marks को छोड़कर सिर्फ ये पता करते हैं किसकी कितनी back आई।

6- "girlfriend" ये सुविधा सिर्फ medical line वालों के लिए होती है।


7- किताबों को chapters के हिसाब से नहीं पढ़ते ।
"बस यार 12 पन्ने और बचे हैं पढ़ने को।"


8- बर्तन सिर्फ तभी धोते हैं जब खाना बनाना हो।


9- कालेज जाने का सिर्फ एक ही मकसद होता है attendance लगवाना।

10- "एक इंजीनियर कुछ नही जानता" ये सिर्फ इंजीनियर ही जानता है।

11- एक रात में सिलेबस खत्म करना इंजीनियर की सबसे बड़ी ताकत है।

12- हर इंजीनियर के फोन में एक hidden folder जरुर होता है।


13- सिर्फ इंजीनियरिंग छोड़कर बाकी सभी course इंजीनियरों के लिए सरल होते हैं ।


14- सुबह 9 बजे उठकर 9:25 पर  class में पहुंचने की क्षमता सिर्फ इंजीनियर में होती है


15- एक आम इंसान खराब चीजों को ठीक करता है 
 पर इंजीनियर पहले चीजों को खराब करते है फिर ठीक।


16- पेट्रोल , सोना , दाल , सब्जी मँहगी होने से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता 
पर नेट पैक मँहगा हो जाये तो ये पागल हो जाते हैं ।


17- किसी के wi- fi का password अगर इन्हें पता चल जाये तो ऐसे उछलते हैं जैसे worldcup जीत लिया हो।


18- इंजीनियर कभी रात में सोते नहीं और सुबह उठते नहीं ।


19- अपने मम्मी पापा के लिए ये दुनिया के most innocent person होते हैं 
और  बाकी सारी दुनिया के लिए yo yo honey singh.


20- सिर्फ इंजीनियरिंग करते समय ही ये पैसे वाले होते है इंजीनियरिंग पूरी होते ही ये बेरोजगार हो जाते हैं ।

तो क्या आपका भी यही मानना है कि Engineering Students ऐसे ही होते हैं? अगर आप Engineering Student हैं या पहले रह चुके तो यह पोस्ट आपके दिल को जरूर छुई होगी ,
और इंजीनियर होने के नाते शेयर करना तो बनता है बॉस ,,,😉
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16 मई 2016

यूपी बोर्ड का एग्जाम और रिजल्ट ! भविष्य के साथ भयंकर चुतियापा

9:12 am 1
एशिया के सबसे बड़े बोर्ड का रिजल्ट आ गया…
आज मंटुआ एतना खुश है की का कहें..मने खिड़की
पर मेहनत करना कामयाब हो गया…
उधर पिंकिया का गोड़ जमीने पर नहीं पड़ रहा
है…


अरे 7 वां के घ की जगह ख लिख दिया था
तबो.. हिंदी में पूरे 80 नम्बर आये हैं..
भले अंग्रेजी में अपने माई बाबूजी और गाँव का
पूरा नाम लिखने नहीं आये लेकिन
अंग्रेजी में 78 नम्बर हैं..
आ काहें न आये 78 नम्बर?
आई लव यू मंटू लिखना उसको एकदम सही सही
आता है..बुझे न आप लोग..
जय हो अकलेस जादो…जय हो मोलायम
सींग... जय हो डीह बाबा आ जय हो काली
माई... आज मनसा पूरन हुआ पिंकिया का।
जहिया मंटुआ मिल गया मातादीन रा के टिबुल
पर….पिंकिया उसको एतना प्यार करेगी कि
जेठ के घामा में बुनी पड़ने लगेगा।
हेने चनमनवा तो आज नाच रहा है….साला
एग्जाम के दू दिन पहिले निरहुआ वाला फिलिम
देख रहा था लेकिन उसका आज 70% से ऊपर
आया है इ तो उसने सपनों में भी नही सोचा
था..
लेकिन पसेरी के भाव में 80% और 75% देखकर
हमारा मनवे दूकइसन हो गया है.
“जा रे जमाना…” कहाँ से कहाँ आ गया।
सुबह से काली माई डीह बाबा और बरम बाबा
को गोहरा रहे गार्जियन भी अपने औलादों की
इस तथाकथित सफलता पर खुश होंगे…..
बलिया के छेड़ी और नगरा भीमपुरा में 2500
सुबिधा शुल्क देकर 80% लाये लौंडे भी कहीं
इतरा ही रहे होंगे…..
सबको मन भर बधाई।
सबके अच्छे नम्बर आएं हैं….
इतने मेधावी लोग कहाँ जाएंगे यही सोच रहा
हूँ…मोदी जी के “मेक इन इंडिया” अभियान की
सफलता पर संदेह नहीं मुझे ।
इधर यूपी में सीरी अकलेस भाई आगामी
विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र समाजवादी
लैपटाप योजना की बैठक करेंगे..थोक वोट का
सवाल है।
भले लैपटाप लेकर कोई बबलुआ बैयासी ढाला पर
हऊ वाला फिलिम डाउनलोड करने की दूकान
खोल दे लेकिन अब लैपटाप उसे मिलकर रहेगा।
उसके इंटर में 80% जो है ।
खैर एक समय था कि गाँव में सत्यप्रकाश और
परमात्मा जैसे लड़के ही मुश्किल से फर्स्ट
डीवीजन आते थे… प्रमोद और राकेश ठेल ठाल के
सेकेण्ड डिवीजन….पिंटू झनमनवा तो बेचारे
कुंडली में ही फेल लिखवाकर आये थे…दस में दस
बार फेल होने के रिकार्ड आज भी है।
फर्स्ट क्लास वालों का भौकाल टाइट
था….जवार भर में शोर…”
“अरे फलाना के लइका फर्स्ट क्लास आइल
बा”
मल्लब की भौकाल टाइट तो फ्यूचर
ब्राइट.बिहान से सत्यप्रकाश के दुआर तिलकहरु
चार काठा कोड़ कर खाल कर देते थे…. ‘बियाह
होखो अब’।
उनके बाबू जी भी नधीया जाते थे..”नाहीं
साइकिल के संगे रेडियो भी चाहीये..ना त
बियाह नही होगा”.
अगुआ खइनी थूककर कहता की “अरे hmt के
घड़ीओ दिआई... बियाह तो करीये..लइकी
हीरा ह हीरा….चिंता मत करीं..पहीले हरदी
छुआ के लइका के नाव दीजिये…।”
ल इहे इधर सत्यप्रकास जी गील..सब न्यूटन और
आर्कमिडीज के सिद्धांत बियाह का नाम
सुनकर ही भूल जाते थे….रात भर लालटेन जलाकर
याद किये गए वो गणित के सूत्र, कामसूत्र के आगे
फ़ीके लगने लगते थे…..
मनवा हुलसता था..अब बियाह होगा बाजा
बजेगा कनिया आएगी.. हाय।
उनके मन में सिकन्दरपुर वाली गुलबशकरी घुलने
लगती।
लेकिन हाय रे भाग्य..बहुते फर्स्ट क्लास
सत्यप्रकाश बियाह करने के बाद बी ए में फेल हो
जाते थे।
फिर उहे दहेज वाली रेडियो सांझ को बजाते
और आपकी फरमाइश पर दिलवाले का गाना
सुनते हुए,गाई बैल को भूसा लेहना देते थे।…
फिर फर्स्ट डिविजन से भूसा का अनैतिक
सम्बन्ध बन जाता था….
धीरे-धीरे डिग्री भूसा हो जाती थी।
आज भी सोचता हूँ कि ये 80% पाने वाले 85%
लौंडों की ये डिग्रियां भूसा ही हैं।
इनका ज्ञान और विवेक से कोई सम्बन्ध नहीं है।
अरे हमारी वर्तमान शिक्षा पद्धति जब तक
परसेंटेज डिग्री और नोकरी से ज्यादा ज्ञान
और विवेक पर जोर नहीं देती तब तक इस 80 और
85% का कोई मोल नहीं…!
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29 मार्च 2016

April Fool की सच्चाई क्या है?

10:58 pm 0

April Fool की सच्चाई क्या है?


अप्रैल फूल" किसी को कहने से पहले इसकी वास्तविक सत्यता जरुर जान ले.!!
पावन महीने की शुरुआत को मूर्खता दिवस कह रहे हो !!
पता भी है क्यों कहते है अप्रैल फूल (अप्रैल फुल का अर्थ है - हिन्दुओ का मूर्खता दिवस).??
ये नाम अंग्रेज ईसाईयों की देन है…
मुर्ख हिन्दू कैसे समझें "अप्रैल फूल" का मतलब बड़े दिनों से बिना सोचे समझे चल रहा है अप्रैल फूल, अप्रैल फूल ???
इसका मतलब क्या है.?? दरअसल जब ईसाइयत अंग्रेजो द्वारा हमे 1 जनवरी का नववर्ष थोपा गया तो उस समय लोग विक्रमी संवत के अनुसार 1 अप्रैल से अपना नया साल बनाते थे, जो आज भी सच्चे हिन्दुओ द्वारा मनाया जाता है, आज भी हमारे बही खाते और बैंक 31 मार्च को बंद होते है और 1 अप्रैल से शुरू होते है, पर उस समय जब भारत गुलाम था तो ईसाइयत ने विक्रमी संवत का नाश करने के लिए साजिश करते हुए 1 अप्रैल को मूर्खता दिवस "अप्रैल फूल" का नाम दे दिया ताकि हमारी सभ्यता मूर्खता लगे अब आप ही सोचो अप्रैल फूल कहने वाले कितने सही हो आप.?
याद रखो अप्रैल माह से जुड़े हुए इतिहासिक दिन और त्यौहार
1. हिन्दुओं का पावन महिना इस दिन से शुरू होता है (शुक्ल प्रतिपदा)
2. हिन्दुओ के रीति -रिवाज़ सब इस दिन के कलेण्डर के अनुसार बनाये जाते है।
3. महाराजा विक्रमादित्य की काल गणना इस दिन से शुरू हुई।
4. भगवान श्री राम का जन्म इस महीने में आता है।
5. परम पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस है।
6. आज का दिन दुनिया को दिशा देने वाला है।
अंग्रेज ईसाई, हिन्दुओ के विरुध थे इसलिए हिन्दू के त्योहारों को मूर्खता का दिन कहते थे और आप हिन्दू भी बहुत शान से कह रहे हो.!!
गुलाम मानसिकता का सुबूत ना दो अप्रैल फूल लिख के.!!
अप्रैल फूल सिर्फ भारतीय सनातन कलेण्डर, जिसको पूरा विश्व फॉलो करता था उसको भुलाने और मजाक उड़ाने के लिए बनाया गया था। 1582 में पोप ग्रेगोरी ने नया कलेण्डर अपनाने का फरमान जारी कर दिया जिसमें 1 जनवरी को नया साल का प्रथम दिन बनाया गया।
जिन लोगो ने इसको मानने से इंकार किया, उनको 1 अप्रैल को मजाक उड़ाना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे 1 अप्रैल नया साल का नया दिन होने के बजाय मूर्ख दिवस बन गया।आज भारत के सभी लोग अपनी ही संस्कृति का मजाक उड़ाते हुए अप्रैल फूल डे मना रहे है।
Source: Whatsapp

Desclaimer: इस पोस्ट में लिखे गए किसी भी वाक्य से इस ब्लॉग का कोई संबंध नही हैं , लेखक ने अपनी निजी भावना को व्यक्त किया है ।
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10 मार्च 2016

Bill Gates द्वारा बताई गयी 10 बाते जिंदगी को सफल बनाने के लिए | जरूर पढ़ें

6:10 am 0
🙇 बिल गेट्स ने एक स्कूल में भाषण के दौरान 10 बातें बताई जो विद्यार्थियों को नहीं सिखाई जाती...




नियम १ – जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है इसकी आदत बना लो.
नियम २ – लोग तुम्हारे स्वाभिमान की परवाह नहीं करते इसलिए पहले खुद को साबित करके दिखाओ.
नियम ३ – कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद 5 आंकड़े वाली पगार की मत सोचो, एक रात में कोई वाइस प्रेसिडेंट नहीं बनता. इसके लिए अपार मेहनत पड़ती है.
नियम ४ – अभी आपको अपने शिक्षक सख्त और डरावने लगते होंगे क्योंकि अभी तक आपके जीवन में बॉस नामक प्राणी से पाला नहीं पड़ा.
नियम ५ – तुम्हारी गलती सिर्फ तुम्हारी है तुम्हारी पराजय सिर्फ तुम्हारी है किसी को दोष मत दो इस गलती से सीखो और आगे बढ़ो.
नियम ६ – तुम्हारे माता पिता तुम्हारे जन्म से पहले इतने निरस और ऊबाऊ नही थे जितना तुम्हें अभी लग रहा है तुम्हारे पालन पोषण करने में उन्होंने इतना कष्ट उठाया कि उनका स्वभाव बदल गया.
नियम ७ – सांत्वना पुरस्कार सिर्फ स्कूल में देखने मिलता है. कुछ स्कूलों में तो पास होने तक परीक्षा दी जा सकती है लेकिन बाहर की दुनिया के नियम अलग हैं वहां हारने वाले को मौका नहीं मिलता.
नियम ८ – जीवन के स्कूल में कक्षाएं और वर्ग नहीं होते और वहां महीने भर की छुट्टी नहीं मिलती. आपको सिखाने के लिए कोई समय नहीं देता. यह सब आपको खुद करना होता है.
नियम ९ – tv का जीवन सही नहीं होता और जीवन tv के सीरियल नहीं होते. सही जीवन में आराम नहीं होता सिर्फ काम और सिर्फ काम होता है .
नियम १० – लगातार पढ़ाई करने वाले और कड़ी मेहनत करने वाले अपने मित्रों को कभी मत चिढ़ाओ. एक समय ऐसा आएगा कि तुम्हें उसके नीचे काम करना पड़ेगा.
"विश्वास " किसी पर इतना करो कि वो तुम्हे फंसाते समय खुद को दोषी समझें...
" प्रेम " किसी से इतना करो कि उसके मन में तुम्हें खोने का डर बना रहे.
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8 मार्च 2016

Examination Chutiyapa | Viral Video

9:16 pm 0



जैसे ही बोर्ड एग्जाम का माहौल आता है  . जितने भी लोगो को एग्जाम देना होता है . भले ही वो पढाई नहीं करते हैं लेकिन जब कोई बोलता है एक काम कर दो ...अरे मेरा बोर्ड है . कुछ समझ नहीं आता क्या आपको .??
जैसे लगता है बोर्ड के Topper वही बनेगा .



ऐसे ही कुछ सियापे को भुवन ने अपने विडियो में एक्सप्रेस किया है . जो सोशल मीडिया पर धम्माल मचा रहा है . अगर आपने यह विडियो नहीं देखा तो मुझे लगता है यह विडियो आपको देखना चाहिए .
वैसे बोर्ड के एग्जाम का जो डर होता है उस डर से लगभग सब लोग गुजर चुके हैं .  आज के टाइम में लड़के बोर्ड के प्रिपरेशन के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का use कर रहे हैं . बोलते हैं एडवांस हैं हम . जैसे ही वो कोई टॉपिक इन्टरनेट पर सर्च करते हैं उसको पढ़ते पढ़ते एक और टैब ओपन कर लेते हैं जिसमे फेसबुक खुला होता हैं . फिर फेसबुक पर पूछ रहे होते हैं कि कितना पढ़ा ... थोड़ी देर में फेसबुक के साथ साथ Youtube भी खुल जाता है . और जब थोडा और टाइम बीत जाये तो वो वाले साइट्स भी ओपन होने लगते हैं . इसको बोलते हैं एडवांस ...!!


पूरा एग्जाम का चुतियापा इस विडियो में देखे ..!!



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6 मार्च 2016

कन्हैया कुमार देशद्रोही के साथ साथ मुर्ख भी है !!

1:09 am 0
कन्हैया की मूर्खता का अंदाजा उसके भाषण से लगाया जा सकता है। वह मोदी जी से कह रहा है...हम क्या मांगे आज़ादी..
आज़ादी वह भी गरीबी से...अरे मूर्ख इस देश को गरीबी मोदी ने नहीं, साठ साल के कांग्रेस शासन ने दी है। तुम्हें यह गरीबी तुम्हारे बिहार के लालू-नीतीश ने दी है। जिस गरीबी की तुम बात कर रहे हो,वह किसी और ने नहीं तुम्हारे ही वामपंथी नेताओं ने दी है। जिन्हें तुम अपना आदर्श मानते हो। यदि तुम्हारी नज़रे ठीक हैं तो एक बार गौर से बंगाल, बिहार जैसे राज्यों की तरफ देखो...तुम्हें सब समझ आ जाएगा। इस देश की गरीबी मोदी की देन नहीं है। इस देश की गरीबी तुम जैसे मूर्ख लड़को की देन है। जो मेहनत करने के बजाए...कैंपस में नारे लगाने में अपनी शान समझते हैं। तुम जैसों को गरीबी से लड़ना नहीं है। उसे पालना, पोसना और बड़ा करना है ताकि तुम कल नेता बन सको। तुम्हें तुम्हारी गरीबी की इतनी ही चिंता होती तो कॉलेज खत्म होने के बाद तुम कैंपस में नेतागीरी नहीं कर रहे होते। तुममें गरीबी से लड़ने की समझ होती तो कैंपस में लेदर का जैकिट और जींस की पैंट पहनकर स्टाईल मारने की जरूरत नहीं होती। तुम्हें गरीबी इतनी ही डसती तो तुम गांधी की तरह अपने कपड़े अब तक दान कर चुके होते। तुम चाहते तो किसी होटल, दुकान, मॉल या शो रूम में पार्ट टाइम काम कर रहे होते। महीना दर महीना अपने मां-पिता को चार पैसे भेज रहे होते। लेकिन नहीं... जेएनयू की सारी मुफ्त सुविधाएं पाकर तुम मगरूर हो गए हो। तुम्हें काहे की गरीबी कि चिंता। गरीबी से तुम नहीं हम जैसे करदाता लड़ रहे हैं। हम अपना टैक्स इसलिए कटवा रहे हैं ताकि गरीब घर से आए बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिल सके। ताकी पढ़-लिखकर तुम गरीबी के नारे नहीं बल्कि उसे दूर करने के उपाय बता सको। ताकी कल जब तुम कुछ बनो तब गर्व से कह सको कि मुझे मेरी गरीबी से हज़ारो-हज़ार करदाताओं ने निजाद दिलाई है। मैं उन करदाताओं को शत-शत नमन करता हूं। जिन्होंने सचमुच गरीबी से जंग लड़ने में इस देश का साथ दिया है। लेकिन नहीं तुम जैसे एहसान फरामोश ऐसा कभी नहीं कह सकते।
असल बात तो यह है कि तुम्हें गरीबी से कोई लेना देना नहीं है। तुम्हें तो गरीबी के नाम पर अपना लाल परचम लहराना है ताकी अगले सौ लालों तक तुम इस देश में गरीब और गरीबी को बनाए रख सको। यदि तुम्हें गरीबी की इतनी ही चिंता है तो अपने नज़दीकी बैंक शाखा में जाओ। वहां से स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया जैसी सरकारी योजना का लाभ उठाओ। लोन के लिए अप्लाई करो। काम करो। अपना एक व्यवसाय खड़ा करो। चार गरीबों को नौकरियां दो। ये कैंपस में खड़े होकर नारे लगाने से गरीबी दूर होने वाली नहीं है। शायद तुम नहीं जानते कि गरीबी का एक नारा सौ गरीबो को जन्म देता है। कहां तो तुम कहते हो कि गरीबों को भीख नहीं रोज़गार चाहिए। यदि ऐसा है तो एक बार फिर अपने बिहार, अपने बंगाल की तरफ देखो। क्यों वहां से सारे कल कारखाने तबाह कर दिए गए। पूछो अपने आकाओं से कि क्या उन्होंने ऐसा कर गरीबी खत्म की या उसे बढ़ाया।
प्यारे भाई, जीवन में कुछ सकारात्मक सोचो। लाल सलाम कहने भर से गरीबी दूर हो जाती तो अब तक बंगाल तरक्की के रास्ते पर होता। लाल सलाम कहने भर से गरीबी से जंग जीती जाती तो इस दुनिया की आधे से अधिक आबादी लाल होती। सूरज भी लाल निकलता और बसंत का रंग भी लाल कहा जाता।  चीन का लाल झण्डा भी आज दुनिया में लाल सलाम की वजह से नहीं अपने औद्योगिक विकास की वजह से बुलंद है।
हंसी तो तब आती है जब तुम गरीबी से ल़ड़ने के लिए राहुल और केजरीवाल जैसे नेताओं का साथ खड़े होते हो। ऐसे नेता जिन्होंने कभी गरीबी का ओर-छोर तक देखा नहीं है। जिन्हें तुम्हारे पेट की भूख नहीं मालूम...तुम्हारे ओठों की प्यास नहीं मालूम...जिन्हें नहीं मालूम की कड़कड़ाती ठंड में बिना कपड़े के कैसे रात गुजारी जाती है। तुम ऐसे नेताओं के साथ गरीबी की जंग लड़ना चाहते हो?
मूर्खता मत करों...अब भी वक्त है सम्हल जाओ। तुम नहीं जानते कि तुम्हारे ये गरीबी के नारे तुम्हारे आकाओं को कितना आनंद देते हैं। तुम्हें तुम्हारे भूखे पेट की इतनी ही चिंता है तो अपने ही नेता राजब्बर से उस ढ़ाबे का पता पूछो जहां 12 रुपए में भर पेट खाना मिलता है।
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4 मार्च 2016

देश संभल जा जरा ! फिर कन्हैया बनने चला है हीरो | Reply To Kanhaiya Kumar's Speech

10:42 pm 0

देश संभल जा जरा ! फिर कन्हैया बनने चला है हीरो !! :-

जैसा कि फ़रवरी के दूसरे सप्ताह से ही जो देश का माहौल बिगड़ा हुआ है वो अब इस स्तर पर जा चूका है कि इसका कोई हद नही है . जो कुछ भी JNU में हुआ वो सभी देश वासियों को पता चला . लेकिन फिर भी परसों कन्हैया कुमार को जब जमानत मिली तो कुछ लोग उसको ऐसे सराहना दे रहे हैं जैसे उसने नोबल पुरस्कार जीत कर लाया हो . और फिर कन्हैया कुमार एक हीरो की तरह JNU कैंपस में एक बार फिर छा गया . और उसके स्पीच तो कुछ लोगो को ऐसा लगा जैसे वो अमृतवाणी सुन रहे हों .
      जो लोग भी कन्हैया कुमार को support कर रहे हैं , ये वही लोग हैं जो JNU Matter होने के बाद ट्विटर , फेसबुक पर हैश टैग लगा कर (#Anti-Nationals , #Gaddar , #TerroristsinJNU ) अपना स्टेटस शेयर कर रहे थे . और जबसे कन्हैया कुमार जेल से छुट कर आया है . ये लोग फिर अपना हैश टैग लगा कर विडियो स्पीच और स्टेटस शेयर करने में लगे हुए है .
      जबसे कन्हैया कुमार जेल से छुट कर आया है , कुछ लोग इतनी खुशिया मन रहे हैं जैसे उसने देश का नाम रोशन किया हो . मैं पूछता हूँ इन लोगो से की कितनी बार आपने खुशिया मनायीं थी जब- जब देश के वीर सैनिकों ने सीमा पर विजय का परचम लहराया था ? कितने दिन तक ट्वीट किया ? कितने दिन तक स्टेटस डाला? और तो और जब कन्हैया कुमार को जेल में भेजा गया तब कुछ लोगो के ऊपर तो ऐसे बीत रहा था मानों उनके ऊपर पहाड़ टूट पड़ा हो . इतने दुखी वो कभी नही हुए . मैं फिर पूछना चाहता हूँ कि जब कोई सैनिक शहीद होता है तो कितने दिन आप शोक मानते हो? या फिर खाना पीना छोड़ देते हो ? आप लोगो से ही पूछ रहा हूँ जो इस दो कौड़ी के कुत्ते के भाषण पर वाह कर रहे हो .
 ऐसा लगता हैं की ये लोग अपने सोशल मीडिया के पोस्ट से ही देश को शिखर तक पंहुचा देंगे . अगर देश में कुछ भी होता है तो सबसे पहले फेसबुक , ट्विटर पर बड़े बड़े दिग्गज लोग का ट्वीट आ जाता है . भले ही घर से बहार निकले 1 सप्ताह हो गया हो .
खैर मैंने भी वो लिंक देखा और मेरे हिसाब से देशद्रोही , कन्हैया कुमार का स्पीच सुना जिस पर सब लोग मंत्रमुग्ध हो गये थे . उसने अपने स्पीच में बोला की जो लोग बॉर्डर पर शहीद हो रहे हैं , मैं उनको salute करता हूँ . जो किसान आत्महत्या कर रहे हैं उनकी चिंता है मुझे . मैंने बोला क्या बात है भाई .!! उस दिन कहा थे जब JNU में भारत के बर्बादी के नारे लग रहे थे ? कहाँ थे उस दिन जब अफज़ल जैसे निर्मम आतंकवादी को ट्रिब्यूट दिया जा रहा था . कहा थे भाई? तेरा वो भाई देशद्रोही उमर खालिद तेरे साथ भारत के बर्बादी तक जंग चलाने और बर्बाद करने के सपने देख रहा था ? तब उस दिन तुझे बॉर्डर पर शहीद हो रहे हमारे देश के सैनिको का ख्याल नहीं आया ?
      कन्हैया ने बोला कि वो देश में भुखमरी , बेरोजगारी , किसान आत्महत्या , शिक्षा से आजादी की बात रहा रहा था . क्या यह बेरोजगारी तब से शुरू हुयी जबसे सरकार बदली ? या किसानों ने आत्महत्या करना तबसे शुरू किया जब मई २०१४ में सरकार बदली ?
अपने आप को स्टूडेंट बोलने वाले कन्हैया तू स्टूडेंट के नाम पर कलंक है . तू एक बार जेल चूका है तुझे खूब सारी पब्लिसिटी भी मिल गयी अब तू किसी भी भ्रष्ट पार्टी के नेता बन सकता है . और तू अपने और तेरे गुरु के अरमानों को पूरा भी कर सकता है .
मैं देश के सभी सम्मानित नागरिकों से विनती करता हूँ कि आप किसी भी देशद्रोही को support करने से पहले एक बार सीमा पर शहीद होते हुए नौजवानों के बारे में सोचो . एक बार उनके परिवार के बारे में सोचो . फिर किसी देशद्रोही के लिए अपने आँखों में नमी लाना .


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3 मार्च 2016

FAN - Official Trailer Reaction & Spoof | Shah Rukh Khan | #RAP

11:05 pm 0
हाय दोस्तों ! २ दिन पहले लांच हुए FAN  मूवी का ट्रेलर जिसमे शाहरुख़ खान की अहम भूमिका है।  इस ट्रेलर ने आते ही यूट्यूब पर धूम मचा दी।  और शाहरुख़  खान के ओवरसीज fans  ने ट्रेलर का रिएक्शन वीडियो भी बनाया और यूट्यूब पर अपलोड कर दी ।

FAN  ट्रेलर youtube पर सबसे तेज 100000 लाइक्स पाने वाला पहला वीडियो बना ,
इसी बीच यूट्यूब का एक growing चैनल "Reactions Among People " ने FAN ट्रेलर का एक छोटा सा spoof ट्रेलर बनाया , जो की काफी appreciable है । अगर आपने अभी तक ये ट्रेलर स्पूफ नहीं देखा है तो आप नीचे embedded वीडियो में देख सकते हैं  ,



 



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28 फ़र॰ 2016

आरक्षण के विरोधियों का विरोध | समीक्षा

6:33 am 0


माननीय
तरूणसागर जी महाराज !
आरक्षण से हंस पिछड रहे है और कौए उड रहे हैं
आप जैन मुनि है ग्यानी हैं सो आपने अपने ग्यान के आधार पर ही ये बात कही होगी !
मसलन :- हंस = सवर्ण
कौए = obc sc st
महामहिम से मेरा निवेदन
१:- ये हंस सिकंदर के समय कहां थे?
२:- ये हंस मुगलों के समय कहां थे ?
३:- ये हंस डच फ्रांसीसी पुर्तगाली और अंग्रेजों के समय कहां थे ?
आपने कहा आरक्षण आर्थिक आधार पर हो ................
महोदय
१:- क्या पंच सरपंच जनपद सदस्य जिला पंचायत सदस्य अध्यक्ष विधायक व सांसद का चुनाव आर्थिक आधार पर होता है ?
२:- क्या कभी आप जैसे प्रकांड विद्वान ने कभी भूलकर भी इस पर कडवे या खट्टे प्रवचन दिए हैं ?
३:- क्या हवाई जहाज भारतीय रेल के रिजर्वेशन व उनकी सुविधायें आर्थिक आधार पर होती हैं ?
४:- क्या अर्थ से संपन्न लोगों ने नौकरी लेना बंद करदी हैं ? क्या वे यह लिखकर देने को तैयार है कि वे नौकरी न लेकर गरीब लोगों को छोडने को तैयार है ?
५:- क्या मंदिर में पुजारी का जन्मजात आरक्षण आर्थिक आधार पर है ? यदि हां तो कैसे?
यदि नहीं तो क्यों नहीं आपके ग्यान चक्षु इस पर प्रकाशित कीजिए ?
६:- नौकरी के अलावा अर्थ का मतलब दूसरी जगह नगण्य है जैसे
मंदिर के पुजारी
कंपनियों के मालिक
जमीन के जमीदार
और
औहदेदार और रसूकदार
......
अत्यंत प्रखर वक्ता मुनि श्रेष्ठ तरुण सागर जी महाराज
अब कौओं की सुन लीजिए
१:- जब सडक पर मुरम गिट्टी बिछाई जाती है तो ये कौए काम आते हैं हंस नहीं २:- जब आप जैसों की शोभा यात्रा निकाली जाती है तो ये कौए बैंड बजाते हैं हंस नही
३:- सडक की सफाई कौए करते हैं हंस नहीं
४:- मंदिर का निर्माण करने में
कौओं का पसीना बहता है हंसो का नही
५:- रेल की पटरी बिछाना पुल बनाना भवन बनाना हो तो कौए आगे आते है हंस नहीं
६:- फसल बौने से काटने तक का काम कौए करते है हंस नहीं ?
७:- सारे गंदे काम कौए करते हैं इसलिए हंसों के गाल लाल होते हैं ?
कौए सारा जीवन हंसों की सेवा करते है और हंस कौओ के साथ क्या करते हैं ? लिखूं ......?
नहीं आप समझदार है
अब जरा सोचिये
१:- कभी कौओं ने किसी भगवान का मंदिर तोडा है ?
२:- कभी कौओ ने किसी हंस महापुरुषों का स्टेच्यु तोडा है? या उसपर कालिख या तेजाब डाला है ?
परंतु
वे कौन लोग हैं जो
१:- भगवान बुद्ध की मूर्ति तोडते हैं ? बाबासाहेब डां. अंबेडकर का स्टेच्यु तोडते व कालिख पौतकर अपने उच्य चरित्र का परिचय देते हैं वे कौए हैं या हंस ?
हंस कभी जातिवाद पर क्यों नहीं बोलते ?
महामुनि जी हम तो ये कौए और हंस की बात भूलना चाहते है ? हम चाहते है हंस और कौए एक ही उपवन में रहे क्योकि भारत का संविधान कहता है यह देश हर भारतवासी का है न कि किसी कौए या हंस का ? हम को ये भेदभाव की खाई भूलने दीजिए ? मुनि जी मुनि जी ही बने रहिए नेता तो बैसे ही गाजर घास की तरह हर जगह पैदा हो जाते है ? आपसे आज इतना अमूल्य ग्यान प्राप्त हुआ हम आपके आभारी है
पर ध्यान रखियेगा ये कौए अंबेडकरवादी है वगैर तर्क लगाये काम ही नहीं करते हैं ! मनुवादी नहीं है जो झांसे में आ जायें
मुनि जी
यदि उपरोक्त बातों से कुछ सीख मिले तो जरूर मंच से बोलिएगा !

वरना हम तो जानते ही हैं कि आप कितने विद्वान है ?
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22 फ़र॰ 2016

भारत के लिए ख़तरा है आतंकवाद या आरक्षण ? जाट आंदोलन | पटेल आंदोलन

10:31 am 0
आप बताओ की भारत के लिए सबसे ज्यादा खतरा किससे है आतंकवाद से या आरक्षण , मुझे तो लगता है की भारत को सबसे ज्यादा खतरा आरक्षण से है न की आतंकवाद से क्यों जब भी भारत में आरक्षण की बात आती है तो लगभग १०० से २०० लोग मारे जाते है तो इसके लिए आतंकवादियों की जररूत ही क्या है |


आप लोगो ने हरियाणा में जो जाट आंदोलन चल रहा हैं उस का मौहोल तो देखा होगा की किस तरह लोग आपस में लड़ रहे है , मेरी समझ में ये नहीं आता है की लोग किस हक़ के लिए लड़ रहे है जो हमें आज ६९ साल पहले मिल चूका है अग्रेजो से |
जाट आन्दोलन में न जाने कितनी ट्रेन रद्द हो गयी , कितनी बसें आग के हवाले हो गए , न जाने कितनी जाने चली गयी , बस आरक्षण के चक्कर में । एक तरफ देश को आगे बढ़ने के लिए कोशिश की जा रही है और एक तरफ खाई में गिराने की कोशिश । 
  देश अब पीछे की और अग्रसर होता हुआ दिखाई दे रहा है । अभी समानंतर में दिल्ली के JNU में स्टूडेंट्स ने देश द्रोही नारे लग रहे थे । युवाओं का पूरा ध्यान इन भ्रष्ट कामो पर केंद्रित करवाया जा रहा है । जिसका पूरा पूरा लाभ राजनैतिक लोगो को मिल रहा हैं । 
सुनने में आ रहा है कि जाट आन्दोलन के परिणाम को देखते हुए राजपूत भी आंदोलन करने वाले हैं , अगर इसी तरह से चलता रहा तो इस देश को बरबाद होने से कोई नही रोक सकता । 
मैं तो यह कहता हु कि अपने आप को इतना मजबूत बनाये कि हमें किसी भी आरक्षण की जरूरत न पड़े ।

आज देश में हर रोज जवान शहीद हो रहे है लकिन उनकी चिंता किसी को नहीं है सब को चिंता है अपने आरक्षण का । अभी हाल ही में रविवार को कश्मीर में 3 जवान शहीद हो गये जिसमे से एक जवान हरियाणा का था आज हरियाणा के जाट को आरक्षण मिला है कल को गुजरात के पटेल आरक्षण के लिए लढाई करंगे उसके फिर किसी और राज्य में ऐसा होगा तो देश का विकास कैसे होगा जब सरकार आरक्षण ही देने में अपना सारा time लगा देगी |
आप भी अपने विचार व्यक्त करे , आपके विचार का स्वागत रहेगा इस ब्लॉग पर,,,








देश आगे बढ़ता है काम करने से न की मांग करने से अभी हल ही में अक्षय कुमार की फिल्म आई थी जिसका नाम एयरलिफ्ट था जिसमे एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो भारत को ऐसा देश मानता था की जो बस केवल बाते करता है और कुछ भी नहीं कर सकता है लकिन जब वह मुशीबत में पड़ता है और उसे इसलिए नहीं मारा जाता क्योकि वह एक भारतीय होता है तब  उसे यहसास होता है की भारत दुनिया के लिए क्या है और वह एक वाक्य कहता है की अब मई कभी ये नहीं कहूँगा की हमारा देश कुछ नहीं कर सकता है |




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19 फ़र॰ 2016

Freedom 251 क्यों न ख़रीदे !! जानिए

12:12 pm 0
जैसा क़ि दो दिन से Freedom251 नाम का फ़ोन बहुत ही ट्रेंडिंग में चल रहा है ,, बहुत से लोग 10-10 फ़ोन बुक करना चाहते हैं , लेकिन सर्वर बिजी होने के कारन बहुत कम लोगो का ही फ़ोन बुक हो पाया है । लेकिन अगर आपने अभी तक फ़ोन को बुक नही किया है तो मेरा एक सुझाव है की आप इस फ़ोन को न ले तो ही बेहतर है। क्योंकि----
ऐसे घोटाला भी हो सकता हे, अगर कंपनी पहले पैसे मांगे, या अपने खाते में जमा करवाने का बोले तो सस्ते मोबाइल का क्लेम करने वाला फ़्रीडम 251 घोटाले के सिवा और कुछ नहीं. 
   रिंगिंग बेल एक फ़्रॉव्ड कम्पनी के सिवा कुछ नहीं.इस बात की पूरी सम्भावना है कि हिंदुस्तान के अंदर सस्ते मोबाइल फ़्रीडम 251- रुपए 251 देने के के नाम पर बहुत बड़ा घपला होने वाला है. 
    सावधान: ये एकदम नई कम्पनी है जिसके बारे में कोई जानकारी भी उपलब्ध नहीं है. और इंटर्नेट पर भी बस 4-5 पन्नो में विवरण आ रहा है. इस कम्पनी की स्थापना बस पिछले वर्ष सितम्बर में हुआ है और इसका वेबसाइड freedom251.com पिछले महीने में हीं ख़रीदा गया है. सस्ते मोबाइल के नाम पर ये 100% घोटाले का हीं काम है.
इसी कम्पनी ( ringing bells.co.in ) ने इसी महीने फ़रवरी में एक स्मार्टफ़ोन रुपए 2999/- में बेचने की कोशिश की पर 10 लोगों का भी ऑर्डर कन्फ़र्म नहीं हुआ. और इस कम्पनी का कोई जवाब भी नहीं आया और इनके द्वारा दिए गए किसी भी नम्बर पर कोई कॉल रिसीव नहीं करता. ईमेल भी बाउन्स बैक हो जाता है. लोग शिकायत कर रहे हैं उन्हें भी इस घोटाले में फँसाया गया और अब यही कम्पनी ऐसे हीं फ़ीचर( 4g की जगह 3G) रुपए 251/- में देने की बात कर रही है ये घोटाला के सिवा और कुछ नहीं दिख रहा. 
    तो कृपया सावधान रहें. ये देखिए किस आसानी से और कितना बड़ा गोलमाल हो सकता है:- 
  अगर रुपए 251/- भाव से भी हिंदुस्तान के सिर्फ़ 1000000 ( 10 लाख ) लोगों ने भी बुक किया तो 251000000 ( पच्चीस करोड़ दस लाख ) सिर्फ़ दो- चार पेज की वेब साइड/ न्यूज़ पेपर ऐड देकर बना लेगी. 
  कम्पनी इस चक्कर में है कि छोटी रक़म समझ कर कोई कुछ नहीं करेगा और भूल जाएगा. 
   अपने 251/- रुपए बचाइए और इस घोटाले का हिस्सा मत बनिए. 
  कम्पनी कल सुबह 6 बजे से इसकी बुकिंग शुरू कर चुकी है,आशा है कि मेरे इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोग पढ़ेंगे और शेयर भी करेंगे ताकि सभी लोग इस गोलमाल को समझ सके और मूर्ख बनने से बच सके. 

कृपया शेयर ज़रूर करे
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18 फ़र॰ 2016

दुनिया का सबसे सस्ता Smartphone FREEDOM 251 - कैसे ख़रीदे

6:34 am 1
दुनिया का सबसे सस्ता Smartphone FREEDOM 251 - कैसे ख़रीदे 
दुनिया का सबसे सस्ता smartphone India ने बनाया है जिसे बनाने का श्रेय घरेलू कंपनी Ringing bells , Noida को जाता है जिन्होंने एक ऐसा smartphone बनाया है जिसकी कीमत मात्र 251 रुपये है जो बेहतरीन feature से लैस है जिसमे 1 GB RAM and  8GB internal मेमोरी और 3G , 4 इंच display, quad core processor ,1400 mah बैटरी है जिसकी नार्मल कीमत कम से कम 5000 रूपये होगी लकिन ringing bells कंपनी इसे केवल 251 रूपये में दे रहा है |

FREEDOM 251 नाम के इस फ़ोन को www.freedom251.com जाये जहा से इसे आप ऑनलाइन बुकिंग कर सकते जो  cash on delivery उपलब्ध है जो 30 जून 2016 को deliver होगा |इस फ़ोन को Make in India और digital india के under में बनाया गया है ringing well कंपनी noida में स्थित है कुछ कंपनियों ने तो भारत सरकार से गुहार लगायी है कि इस फ़ोन को कम से कम ३७०० रुपये में बेचा जाना चाहिए इस फ़ोन में Make in India से जुड़े सारे app रहेंगे जैसे की Clean india , Farmer, WhatsApp , मेडिकल etc. freedom 251 जैसे feature वाले फ़ोन की कीमत लगभग 5000 से 10000 के बीच में होगी |



माना जा रहा है की Make in india के under होने के कारण इस फ़ोन पर कोई भी टैक्स नहीं लगया जा रहा है जिसकी वजह से ये फ़ोन इतना सस्ता है जो सारे कंपनियों के लिए एक परेशानी बन गया है क्योकि आज freedom 251 की वेबसाइट पर 600000 visiter per सेकेंड आ रहे है जो की भारत के किसी भी वेबसाइट से कही ज्यादा ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है जो की भी smartphone कंपनी के वेबसाइट visitor का माना जा रहा है की करीबन २०००००००  लोगो अभी तक इस फ़ोन का आर्डर किया है जो अपने आप में एक दिन में इतने फ़ोन आर्डर करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है | 

Freedom 251 फ़ोन को कैसे  ख़रीदे:-
Ringing Bells ने Freedom 251 को बेचने के लिए एक अलग से वेबसाइट लांच किया था जो फ़ोन के नाम पर ही है - www.Freedom251.com .  लेकिन यह ववेबसाइट 18 /02/2016  सुबह से ही डाउन चल रहा है जिसके चलता Customers को  फ़ोन बुक करने में बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है .
   लेकिन कंपनी ने यह दावा किया है की २४ घंटे के अन्दर वेबसाइट का सर्वर तंदुरस्त हो जायेगा . तो आप लोगो अगर इस फ़ोन को बुक करना चाहते हैं तो आपको बार बार वेबसाइट को चेक करने पड़ेगा . 

और अगर आप में से किसी ने इस फ़ोन को बुक कर लिया है आपको बहुत बहुत बधाई ...!!
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17 फ़र॰ 2016

भारत दुनिया के लिए एक बाज़ार क्यों ?

10:27 pm 0
भारत आज दुनिया के लिए एक बाज़ार बन गया गया है हर देश ये जनता है की भारत में कुछ भी बिक सकता है, चाहे देश के नेता हो या देश के अधिकारी भारत में सब बिकता है|
ऐसा क्यों है की हम दुनिया के लिए एक बाज़ार बन गए है क्या हमारे पास किसी भी चीज़ की कमी है ? आज हमारा देश दुनिया के सबसे जायदा Tallent person  देने में नंबर एक पर है लकिन फिर भी हमारा देश एक बाज़ार है हम अपनी लिए सारी चीज़े  खुद क्यों नहीं बनाते है |

क्या हम कामचोर है ऐसा कुछ भी नहीं है हम बस आलसी है हम अपना कम दुसरो पर निर्भर करते है ,गूगल को अमेरिका ने बनया लकिन वहा सबसे ज्यादा भारतीय है, क्या हमारे देश के scientist नहीं बना सकते है?? बना सकते है लकिन बनाना नहीं चाहते यह पर कोई काम नहीं करना चाहता है उअर ये विदेश जाकर सारे काम अच्छे से करते है हमारे  देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने  Digital india की योजना बनायीं जिसके तहत भारत में हर उस व्यक्ति को मौका मिलेगा जिसमे कुछ करने की लगन हो फिर आज देश के सारे IIT में पढ़ने वाले बच्चे अमेरिका जैसे देश में पैसा कमाने के लिए  जाते है क्या वह india में पैसा नहीं कमा सकते लकिन उन्हें देश से ज्यादा पैसो की जरुरत है आज अमेरिका के पास सब कुछ है क्योकि वहा के लोग पहले अपने देश को priority देते है और वो चाहते है की हमारे देश में किसी को किसी भी वस्तु के लिए दुसरो के पास न जाना पड़े | 
               भारत में इतनी कुव्वत है कि वह मौजूदा कृषि उत्पादन में १0 गुना का इजाफा कर सके। इस्राइल में खेती योग्य जमीन पर प्रति वर्ग किलोमीटर कृषि उत्पादन से ५.८ मिलियन अमेरिकी डॉलर की कमाई होती है। भारत में यह केवल ८८,000 अमेरिकी डॉलर है। २00६-0७ के आर्थिक सर्वे ने कृषि क्षेत्र की कुछ ढांचागत कमोजरियों की ओर इशारा किया है, जिसमें गेहूं और चावल की यादा उपज वाली नई प्रजातियों की घटती उपज क्षमता, फर्टिलाइजरों का असंतुलित इस्तेमाल, बीजों की वापसी के कम दाम और कमोबेश सभी फसलों की प्रति यूनिट एरिया में कम होती उपज शामिल हैं। कृषि विकास पर भी बुरा असर पड़ा है क्योंकि बुआई की कुल जमीन का तकरीबन ६५ फीसदी हिस्सा अभी बरसात पर ही निर्भर है।
              एेसी ही कहानी पानी की भी है। भारत हर साल मिलने वाले ४000 बिलियन क्यूबिक मीटर ताजे पानी का केवल एक चौथाई हिस्सा ही इस्तेमाल कर पाता है। इसकी वजह सीमित जमीनी दायरे तक इसकी पहुंच, जल संसाधनों का असमान वितरण और कम बांध क्षमता हैं। कृषि उत्पादन में इस्तेमाल पानी के महज १४वें हिस्से को ही बेहतरीन श्रेणी में रखा जा सकता है।
          भारत को कायाकल्प कर सकने वाली तकनीकों पर अपना ध्यान कें्िरत करना चाहिए। मेरे विचार से, आधुनिक दवाओं, वैकिल्पक ऊर्जाओं, नेटवर्क कम्युनिकेशन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, प्रदर्शनकारी पदार्थो, बायोटेक्नॉलजी, नैनोटेक्नॉलजी, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और एयरोस्पेस के क्षेत्रों में खास ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
हमारा सपना एक ऐसे विकसित भारत का सपना है जिसमें जनसंख्या का परिमाण स्थिर होगा जनता का मत व्यवहार जाति और धर्म के आधार पर नहीं बल्कि सरकार की नीतियों, उपलब्धियों एवं दक्षता के मूल्याँकन के आधार पर होगा। भारतीय राजनीति में ये सर्वप्रमुख आवश्यकता है जब जनता में राष्ट्रीयता और विकास के प्रति ऐसी भावना जागृत की जा सके जब राजनैतिक दल जनता को जाति, धर्म, नृजातियता एवं समुदाय या संप्रदाय के आधार पर विभाजित न कर सकें। यदि ऐसा हुआ तभी राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करना सम्भव हो पायेगा। सामाजिक, आर्थिक लक्ष्य राजनैतिक प्रणाली निर्धारित करती है और राजनीति में सरकार का चुना जाना जनता पर निर्भर करता है जब जनता शिक्षित होगी राष्ट्रीय हितों के
प्रति जागरुक होगी तो वो ऐसे नेता चुनेगी जिनका दृष्टिकोण विकास उन्मुख एवं राष्ट्रीयता से परिपूर्ण हो और जो किसी जाति किसी सम्प्रदाय के प्रतिनिधि न बनकर राष्ट्रीय विकास की संकल्पना का प्रतिनिधित्व करे। अर्थात विकसित भारत के सपने के पीछे छुपी हुई असंख्य पूर्वापेक्षायें हैं जिनका पूर्ण होना आवश्यक है।
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