देश संभल जा जरा ! फिर कन्हैया बनने चला है हीरो | Reply To Kanhaiya Kumar's Speech

देश संभल जा जरा ! फिर कन्हैया बनने चला है हीरो !! :-

जैसा कि फ़रवरी के दूसरे सप्ताह से ही जो देश का माहौल बिगड़ा हुआ है वो अब इस स्तर पर जा चूका है कि इसका कोई हद नही है . जो कुछ भी JNU में हुआ वो सभी देश वासियों को पता चला . लेकिन फिर भी परसों कन्हैया कुमार को जब जमानत मिली तो कुछ लोग उसको ऐसे सराहना दे रहे हैं जैसे उसने नोबल पुरस्कार जीत कर लाया हो . और फिर कन्हैया कुमार एक हीरो की तरह JNU कैंपस में एक बार फिर छा गया . और उसके स्पीच तो कुछ लोगो को ऐसा लगा जैसे वो अमृतवाणी सुन रहे हों .
      जो लोग भी कन्हैया कुमार को support कर रहे हैं , ये वही लोग हैं जो JNU Matter होने के बाद ट्विटर , फेसबुक पर हैश टैग लगा कर (#Anti-Nationals , #Gaddar , #TerroristsinJNU ) अपना स्टेटस शेयर कर रहे थे . और जबसे कन्हैया कुमार जेल से छुट कर आया है . ये लोग फिर अपना हैश टैग लगा कर विडियो स्पीच और स्टेटस शेयर करने में लगे हुए है .
      जबसे कन्हैया कुमार जेल से छुट कर आया है , कुछ लोग इतनी खुशिया मन रहे हैं जैसे उसने देश का नाम रोशन किया हो . मैं पूछता हूँ इन लोगो से की कितनी बार आपने खुशिया मनायीं थी जब- जब देश के वीर सैनिकों ने सीमा पर विजय का परचम लहराया था ? कितने दिन तक ट्वीट किया ? कितने दिन तक स्टेटस डाला? और तो और जब कन्हैया कुमार को जेल में भेजा गया तब कुछ लोगो के ऊपर तो ऐसे बीत रहा था मानों उनके ऊपर पहाड़ टूट पड़ा हो . इतने दुखी वो कभी नही हुए . मैं फिर पूछना चाहता हूँ कि जब कोई सैनिक शहीद होता है तो कितने दिन आप शोक मानते हो? या फिर खाना पीना छोड़ देते हो ? आप लोगो से ही पूछ रहा हूँ जो इस दो कौड़ी के कुत्ते के भाषण पर वाह कर रहे हो .
 ऐसा लगता हैं की ये लोग अपने सोशल मीडिया के पोस्ट से ही देश को शिखर तक पंहुचा देंगे . अगर देश में कुछ भी होता है तो सबसे पहले फेसबुक , ट्विटर पर बड़े बड़े दिग्गज लोग का ट्वीट आ जाता है . भले ही घर से बहार निकले 1 सप्ताह हो गया हो .
खैर मैंने भी वो लिंक देखा और मेरे हिसाब से देशद्रोही , कन्हैया कुमार का स्पीच सुना जिस पर सब लोग मंत्रमुग्ध हो गये थे . उसने अपने स्पीच में बोला की जो लोग बॉर्डर पर शहीद हो रहे हैं , मैं उनको salute करता हूँ . जो किसान आत्महत्या कर रहे हैं उनकी चिंता है मुझे . मैंने बोला क्या बात है भाई .!! उस दिन कहा थे जब JNU में भारत के बर्बादी के नारे लग रहे थे ? कहाँ थे उस दिन जब अफज़ल जैसे निर्मम आतंकवादी को ट्रिब्यूट दिया जा रहा था . कहा थे भाई? तेरा वो भाई देशद्रोही उमर खालिद तेरे साथ भारत के बर्बादी तक जंग चलाने और बर्बाद करने के सपने देख रहा था ? तब उस दिन तुझे बॉर्डर पर शहीद हो रहे हमारे देश के सैनिको का ख्याल नहीं आया ?
      कन्हैया ने बोला कि वो देश में भुखमरी , बेरोजगारी , किसान आत्महत्या , शिक्षा से आजादी की बात रहा रहा था . क्या यह बेरोजगारी तब से शुरू हुयी जबसे सरकार बदली ? या किसानों ने आत्महत्या करना तबसे शुरू किया जब मई २०१४ में सरकार बदली ?
अपने आप को स्टूडेंट बोलने वाले कन्हैया तू स्टूडेंट के नाम पर कलंक है . तू एक बार जेल चूका है तुझे खूब सारी पब्लिसिटी भी मिल गयी अब तू किसी भी भ्रष्ट पार्टी के नेता बन सकता है . और तू अपने और तेरे गुरु के अरमानों को पूरा भी कर सकता है .
मैं देश के सभी सम्मानित नागरिकों से विनती करता हूँ कि आप किसी भी देशद्रोही को support करने से पहले एक बार सीमा पर शहीद होते हुए नौजवानों के बारे में सोचो . एक बार उनके परिवार के बारे में सोचो . फिर किसी देशद्रोही के लिए अपने आँखों में नमी लाना .


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