May 2016 - Altu & Faltu

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23 मई 2016

क्या सभी Engineering Students ऐसे ही होते हैं?

12:33 am 0
क्या आप एक Engineering Student हैं? अगर हाँ तो इस आर्टिकल को पढ़ते ही आपके दिल में गिटार जरूर बजेगा। और अगर आप एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट नही है तो भी आपको पढ़ना चाहिए,,
"Engineering students"


1-  हमेशा 2 अलार्म लगाते हैं एक  थोड़ा थोड़ा उठने के लिए , और दूसरा सचमुच में उठने के लिए ।

2- Deo सिर्फ इसलिए लगाते हैं ताकि कोई ये न पता कर पाये कि ये बिना नहाये class में आया है।

3- गंदे कपड़ों में भी, कम गंदे कपड़े  ढूंढ ढूंढ कर निकालते है।

4- कंपनियाँ Maggie Noodles सिर्फ इसलिए बनातीं हैं ताकि ये लोग भूखे न मरे ।

5- रिजल्ट आने पर marks को छोड़कर सिर्फ ये पता करते हैं किसकी कितनी back आई।

6- "girlfriend" ये सुविधा सिर्फ medical line वालों के लिए होती है।


7- किताबों को chapters के हिसाब से नहीं पढ़ते ।
"बस यार 12 पन्ने और बचे हैं पढ़ने को।"


8- बर्तन सिर्फ तभी धोते हैं जब खाना बनाना हो।


9- कालेज जाने का सिर्फ एक ही मकसद होता है attendance लगवाना।

10- "एक इंजीनियर कुछ नही जानता" ये सिर्फ इंजीनियर ही जानता है।

11- एक रात में सिलेबस खत्म करना इंजीनियर की सबसे बड़ी ताकत है।

12- हर इंजीनियर के फोन में एक hidden folder जरुर होता है।


13- सिर्फ इंजीनियरिंग छोड़कर बाकी सभी course इंजीनियरों के लिए सरल होते हैं ।


14- सुबह 9 बजे उठकर 9:25 पर  class में पहुंचने की क्षमता सिर्फ इंजीनियर में होती है


15- एक आम इंसान खराब चीजों को ठीक करता है 
 पर इंजीनियर पहले चीजों को खराब करते है फिर ठीक।


16- पेट्रोल , सोना , दाल , सब्जी मँहगी होने से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता 
पर नेट पैक मँहगा हो जाये तो ये पागल हो जाते हैं ।


17- किसी के wi- fi का password अगर इन्हें पता चल जाये तो ऐसे उछलते हैं जैसे worldcup जीत लिया हो।


18- इंजीनियर कभी रात में सोते नहीं और सुबह उठते नहीं ।


19- अपने मम्मी पापा के लिए ये दुनिया के most innocent person होते हैं 
और  बाकी सारी दुनिया के लिए yo yo honey singh.


20- सिर्फ इंजीनियरिंग करते समय ही ये पैसे वाले होते है इंजीनियरिंग पूरी होते ही ये बेरोजगार हो जाते हैं ।

तो क्या आपका भी यही मानना है कि Engineering Students ऐसे ही होते हैं? अगर आप Engineering Student हैं या पहले रह चुके तो यह पोस्ट आपके दिल को जरूर छुई होगी ,
और इंजीनियर होने के नाते शेयर करना तो बनता है बॉस ,,,😉
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16 मई 2016

यूपी बोर्ड का एग्जाम और रिजल्ट ! भविष्य के साथ भयंकर चुतियापा

9:12 am 1
एशिया के सबसे बड़े बोर्ड का रिजल्ट आ गया…
आज मंटुआ एतना खुश है की का कहें..मने खिड़की
पर मेहनत करना कामयाब हो गया…
उधर पिंकिया का गोड़ जमीने पर नहीं पड़ रहा
है…


अरे 7 वां के घ की जगह ख लिख दिया था
तबो.. हिंदी में पूरे 80 नम्बर आये हैं..
भले अंग्रेजी में अपने माई बाबूजी और गाँव का
पूरा नाम लिखने नहीं आये लेकिन
अंग्रेजी में 78 नम्बर हैं..
आ काहें न आये 78 नम्बर?
आई लव यू मंटू लिखना उसको एकदम सही सही
आता है..बुझे न आप लोग..
जय हो अकलेस जादो…जय हो मोलायम
सींग... जय हो डीह बाबा आ जय हो काली
माई... आज मनसा पूरन हुआ पिंकिया का।
जहिया मंटुआ मिल गया मातादीन रा के टिबुल
पर….पिंकिया उसको एतना प्यार करेगी कि
जेठ के घामा में बुनी पड़ने लगेगा।
हेने चनमनवा तो आज नाच रहा है….साला
एग्जाम के दू दिन पहिले निरहुआ वाला फिलिम
देख रहा था लेकिन उसका आज 70% से ऊपर
आया है इ तो उसने सपनों में भी नही सोचा
था..
लेकिन पसेरी के भाव में 80% और 75% देखकर
हमारा मनवे दूकइसन हो गया है.
“जा रे जमाना…” कहाँ से कहाँ आ गया।
सुबह से काली माई डीह बाबा और बरम बाबा
को गोहरा रहे गार्जियन भी अपने औलादों की
इस तथाकथित सफलता पर खुश होंगे…..
बलिया के छेड़ी और नगरा भीमपुरा में 2500
सुबिधा शुल्क देकर 80% लाये लौंडे भी कहीं
इतरा ही रहे होंगे…..
सबको मन भर बधाई।
सबके अच्छे नम्बर आएं हैं….
इतने मेधावी लोग कहाँ जाएंगे यही सोच रहा
हूँ…मोदी जी के “मेक इन इंडिया” अभियान की
सफलता पर संदेह नहीं मुझे ।
इधर यूपी में सीरी अकलेस भाई आगामी
विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र समाजवादी
लैपटाप योजना की बैठक करेंगे..थोक वोट का
सवाल है।
भले लैपटाप लेकर कोई बबलुआ बैयासी ढाला पर
हऊ वाला फिलिम डाउनलोड करने की दूकान
खोल दे लेकिन अब लैपटाप उसे मिलकर रहेगा।
उसके इंटर में 80% जो है ।
खैर एक समय था कि गाँव में सत्यप्रकाश और
परमात्मा जैसे लड़के ही मुश्किल से फर्स्ट
डीवीजन आते थे… प्रमोद और राकेश ठेल ठाल के
सेकेण्ड डिवीजन….पिंटू झनमनवा तो बेचारे
कुंडली में ही फेल लिखवाकर आये थे…दस में दस
बार फेल होने के रिकार्ड आज भी है।
फर्स्ट क्लास वालों का भौकाल टाइट
था….जवार भर में शोर…”
“अरे फलाना के लइका फर्स्ट क्लास आइल
बा”
मल्लब की भौकाल टाइट तो फ्यूचर
ब्राइट.बिहान से सत्यप्रकाश के दुआर तिलकहरु
चार काठा कोड़ कर खाल कर देते थे…. ‘बियाह
होखो अब’।
उनके बाबू जी भी नधीया जाते थे..”नाहीं
साइकिल के संगे रेडियो भी चाहीये..ना त
बियाह नही होगा”.
अगुआ खइनी थूककर कहता की “अरे hmt के
घड़ीओ दिआई... बियाह तो करीये..लइकी
हीरा ह हीरा….चिंता मत करीं..पहीले हरदी
छुआ के लइका के नाव दीजिये…।”
ल इहे इधर सत्यप्रकास जी गील..सब न्यूटन और
आर्कमिडीज के सिद्धांत बियाह का नाम
सुनकर ही भूल जाते थे….रात भर लालटेन जलाकर
याद किये गए वो गणित के सूत्र, कामसूत्र के आगे
फ़ीके लगने लगते थे…..
मनवा हुलसता था..अब बियाह होगा बाजा
बजेगा कनिया आएगी.. हाय।
उनके मन में सिकन्दरपुर वाली गुलबशकरी घुलने
लगती।
लेकिन हाय रे भाग्य..बहुते फर्स्ट क्लास
सत्यप्रकाश बियाह करने के बाद बी ए में फेल हो
जाते थे।
फिर उहे दहेज वाली रेडियो सांझ को बजाते
और आपकी फरमाइश पर दिलवाले का गाना
सुनते हुए,गाई बैल को भूसा लेहना देते थे।…
फिर फर्स्ट डिविजन से भूसा का अनैतिक
सम्बन्ध बन जाता था….
धीरे-धीरे डिग्री भूसा हो जाती थी।
आज भी सोचता हूँ कि ये 80% पाने वाले 85%
लौंडों की ये डिग्रियां भूसा ही हैं।
इनका ज्ञान और विवेक से कोई सम्बन्ध नहीं है।
अरे हमारी वर्तमान शिक्षा पद्धति जब तक
परसेंटेज डिग्री और नोकरी से ज्यादा ज्ञान
और विवेक पर जोर नहीं देती तब तक इस 80 और
85% का कोई मोल नहीं…!
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